थाना बिलाईगढ़

   थाना का स्थापना सन् 1888 तक यहां जमीदारी प्रथा थी जिसकी अपनी पुलिस थी । पहले कटगी एवं बिलाईगढ़ में चौकिया थी, शिवरीनारायण थाना के अंतर्गत थी। सन् 1906 में बिलाईगढ़ को पृथक थाना बनाया गया एवं दिनांक 01-01-1906 को थाना एवं आवास भवन का निर्माण हुआ जो बिलासपुर जिले के अंतर्गत था । सन् 1906 मे बिलाईगढ़ थाना जिला रायपुर में ले लिया गया । सर्व प्रथम इस थाना में एक उपनिरीक्षक, 04 सहायक उपनिरीक्षक, 04 प्रधान आरक्षक एवं 12 आरक्षक के पद स्वीकृत थे।

   महानदी के दक्षिण-पश्चिम में बलौदाबाजार तहसील के पूर्वी कोने में स्थित है आदिवासी जाति के अंतर्गत गोड़ जाति भैना लोगो संबलपुर के राजा पकड़वा कर एक खोहे में बंद कर आग लगा दी। लेकिन धमतरी की बिलईमाता की प्रार्थना करने पर उनकी जान बच गई । तब से इस कस्बे का नाम बिलाईगढ़ पड़ा । तब मांझी मरवार जो उनमें प्रमुख था 42 गांव ईनाम स्वरूप प्राप्त किया तब इसका बयालिसगढ़ पड़ परिमार्जित कस्बा बिलाईगढ़ के नाम से विख्यात हुआ ।

   जमींदारी की श्रृंखला के अंत में दीवान श्री जितेन्द्र बहादुर सिंह जमींदारी के उत्तराधिकारी हुए । दिनांक 15-08-1963 तक द्वितीय दण्डाधिकारी का न्यायालय था, अब एस डी एम न्यायालय, तहसीलदार, सब रजिस्टार, सी,ई,ओ, वन विभाग, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द् महाविद़यालय अनेक शासकीय कार्यालय एवं कर्मचारी उपलब्ध है ।

   थाना क्षेत्र 02 विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत है जो निम्न है – 01 कसडोल 1- भटगांव यह अनु जाति , अनु जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है । थाने का क्षेत्रफल 1460 वर्गकिमी , थाना क्षेत्र की जनसंख्या 117652 लगभग है। थाना क्षेत्र में कुल 181 ग्राम है वर्तमान में थाना क्षेत्र के अंतर्गत नगर पंचायत भटगांव को उप तहसील का दर्जा प्राप्त हुआ है और पुलिस चौकी की स्वीकृति राज्य शासन द्वारा दिनांक 07-09-2002 को प्रदान की गई है।

   वर्तमान में थाना क्षेत्र में 02 विधानसभा कसडोल एवं बिलाईगढ़ के अंतर्गत है । यह अनुसूचित जाति एवं जनजाति बाहुल्य है थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिलाईगढ़ में ही माता समलेश्वरी का मंदिर है जहां दोनो नवरात्रि पर्व के दौरान ज्योति कलश का स्थापना किया जाता है श्रद्धालुओं में दर्शनार्थियों का भीड़ भारी मात्रा में उपस्थित रहता है ।