थाना सिमगा

       यह एक एैतिहासिक ग्राम है इस क्षेत्र में सन 1745 के पूर्व हैहयवंशीय राजाओ का राज्य था सन 1745 में रघुजी भोसले ने इस क्षेत्र पर नरसिंह को अपनी ओर से रतनपुर राजधानी पर हैहयवंशीय राज्यशासन सौपा। सन 1818 में अंग्रेजो के विरूध्द युध्द में मराठों का पतन हुआ तथा सन 1800 तक सर्वोच्च अधिकार प्राप्त रहे, बाद में स्थानीय राजा को शासन वापस दे दिया गया। राजा के निःसंतान होने से 1854 में राज्य खालसा कर दिया । सन 1856 मे जिला रायपुर की तहसीलें रायपुर बिलासपुर ए वं धमतरी बनी तथा सन 1857 में दुर्ग तहसील बनी। सन 1861 में बिलासपुर जिला बना 01 जनवरी 1906 को दुर्ग पृथक जिला बना फिर सिमगा तहसील तोडकर बलौदाबाजार तहसील बनी।

   सन 1888 तक जमीदारों की अपनी पुलिस थी सन 1897 में इसे थाने के अंतर्गत विश्रामपुर, नवापारा , बेमेतरा, खंडसरा एवं मुलमुला यह नेवरा आउट पोस्ट बना तथा सन 1956 से पृथक थाना बना।

   सन 1907 में तहसील इमारत में रूपये 5682 खर्च कर थाना मंे परिवर्तित कर थानेदार निवास की व्यवस्था हुई तथा तहसील कर्मचारी के लिए निवास बना। पूर्व महानिरीक्षक श्री प्रेमचंद सक्सेना की यह जन्म भूमि है।

   सन 1916-17 में लोकनिर्माण विभाग का विश्रामगृह का निर्माण हुआ, सन 1920 में ग्राम पंचायत कमेटी कायम हुआ सन 1922 मे मोटर सेवा शुरू हुई, तथा सन 1956 में बिजली, 1959 में नल, हाईस्कुल बना तथा सन 1956 में विकासखंड, दूरभाष, पोस्ट आफिस शुरू हुआ। सन 1983 मे जनपद पंचायत भंगकर नगरपालिका बना तथा तहसील सिमगा बना तथा सन 1994 में पुनः नगरपालिका से नगरपंचायत में परिवर्तित किया गया।